पसान वन जांच नाका में खुलेआम अवैध वसूली का खेल, सील-मुहर के नाम पर वाहनों से वसूले जा रहे रुपये!
कोयला और गौण खनिज परिवहन करने वाले वाहनों से प्रतिदिन हजारों रुपये की कथित उगाही, जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
कटघोरा/पसान।
कोरबा एवं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले मध्य प्रदेश राज्य को जोड़ने वाली सीमा पर स्थित मातिनदाई वन जांच नाका बैरियर इन दिनों कथित अवैध वसूली को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों , वाहन चालकों तथा परिवहन से जुड़े लोगों का आरोप है कि कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र के अंतर्गत संचालित इस बैरियर में नियमों की आड़ लेकर वाहनों से खुलेआम रकम वसूली की जा रही है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह मामला न केवल विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि शासन को होने वाले राजस्व नुकसान की ओर भी गंभीर संकेत देता है।
वन विभाग द्वारा स्थापित इस बैरियर का मुख्य उद्देश्य वन संपदा एवं गौण खनिज के परिवहन की वैधता की जांच करना है। यहां से गुजरने वाले वाहनों के दस्तावेजों की जांच की जाती है तथा सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर परिवहन संबंधी दस्तावेजों पर सील-मुहर लगाकर वाहनों को आगे जाने की अनुमति दी जाती है। इसके लिए विभाग द्वारा एक डिप्टी रेंजर सहित दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई है।
जांच के नाम पर वसूली का आरोप
वाहन चालकों का आरोप है कि बैरियर पर दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ सील लगाने के नाम पर प्रत्येक वाहन से नगद राशि ली जाती है। बताया जा रहा है कि कोयला परिवहन करने वाले वाहनों से 20 से 50 रुपये प्रति ट्रिप तक वसूले जाते हैं, जबकि मिट्टी एवं अन्य गौण खनिज लेकर चलने वाले हाईवा वाहनों से इससे अधिक राशि भी लिए जाने के आरोप हैं। चूंकि एक वाहन दिनभर में कई चक्कर लगाता है, इसलिए प्रतिदिन वसूली की राशि हजारों रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

एक ही रॉयल्टी पर कई बार परिवहन की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में एक ही रॉयल्टी पर्ची का उपयोग कई बार परिवहन के लिए किया जाता है। आरोप है कि बैरियर में कथित तौर पर नजराना देने के बाद वाहनों को बिना किसी विशेष जांच के आगे जाने दिया जाता है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासन के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाने वाला मामला हो सकता है।
रात में बढ़ जाता है अवैध परिवहन?
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि दिन के समय औपचारिक जांच दिखाई देती है, लेकिन रात के समय खनिज परिवहन पर निगरानी कमजोर पड़ जाती है। आरोप है कि देर रात कई वाहन बिना प्रभावी जांच के गुजर जाते हैं। यदि यह सही है तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
तीन विभागों की जिम्मेदारी, फिर भी सवाल बरकरार
खनिज परिवहन की निगरानी में वन विभाग, खनिज विभाग और राजस्व/प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद यदि सीमा क्षेत्र में अवैध वसूली अथवा नियमों के विपरीत परिवहन हो रहा है तो यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो शासन को लगातार राजस्व की हानि होती रहेगी।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
ग्रामीणों, वाहन संचालकों और क्षेत्र के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बैरियर पर लगे सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज तथा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मतिनदाई वन अवरोध बैरियर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बाद अब सबकी निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल अवैध वसूली का मामला नहीं, बल्कि शासन के राजस्व और विभागीय पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय होगा। वहीं, यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही आवश्यक है।
फिलहाल क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या जिम्मेदार विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएंगे, या फिर सीमा पर कथित अवैध वसूली का यह सिलसिला पहले की तरह चलता रहेगा।
