सड़क किनारे खुलेआम हो रही राखड़ डंपिंग, उड़ती धूल से राहगीरों की जान जोखिम में, प्रशासन के निर्देश साबित हो रहे बेअसर
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा।
कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र में फ्लाई ऐश (राखड़) परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। प्रशासन और पर्यावरण विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले निर्देशों के बावजूद क्षेत्र में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। हालात यह हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कई प्रमुख मार्गों के किनारे बिना किसी अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था के राखड़ डंप की जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि राहगीरों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन लोगों को अपनी निजी जमीन की भराई (पर्टिंग) करानी होती है, वे सीधे ट्रांसपोर्टरों से संपर्क कर लेते हैं। इसके बाद बिना किसी विभागीय अनुमति, पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन किए मनचाहे स्थानों पर राखड़ गिरा दी जाती है। राखड़ डालने के बाद उस पर मिट्टी भी नहीं डाली जाती, जिससे तेज हवा चलते ही राखड़ का महीन धूलकण कई किलोमीटर तक फैल जाता है।
सड़कें बन रही हैं धूल का गुबार, दुर्घटनाओं का बढ़ा खतरा
कटघोरा से तानाखार, पोड़ी, गुरसियां, चोटिया, लमना और अन्य क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग एवं संपर्क मार्गों के किनारे अनेक स्थानों पर राखड़ के बड़े-बड़े ढेर देखे जा सकते हैं। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हवा में उड़ती राखड़ आंखों में चली जाती है, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन चालक धूल के गुबार के कारण सामने से आ रहे वाहन तक नहीं देख पाते। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
सांस की बीमारियों का बढ़ रहा खतरा
राखड़ से उड़ने वाली महीन धूल केवल सड़क सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि लगातार उड़ती धूल के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। कई लोगों को आंखों में जलन, एलर्जी और खांसी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार फ्लाई ऐश के सूक्ष्म कण लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं, जो फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। ऐसे में निर्धारित मानकों के अनुरूप ही इसका परिवहन और डंपिंग किया जाना आवश्यक है।
पहले भी उठ चुका है मामला, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
कुछ दिन पहले चोटिया परला क्षेत्र में भी राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे राखड़ डंपिंग का मामला सामने आया था। उस समय राखड़ के ऊपर मिट्टी नहीं डाली गई थी, जिससे तेज हवा के साथ पूरा डस्ट हाईवे पर उड़ रहा था। स्थानीय लोगों ने शिकायत की, समाचार भी प्रकाशित हुए, लेकिन उसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आज भी वहां स्थिति लगभग जस की तस बनी हुई है।
प्रशासन के निर्देश कागजों तक सीमित
जानकारी के अनुसार प्रशासन समय-समय पर ट्रांसपोर्टरों को निर्धारित स्थानों पर ही राखड़ परिवहन एवं डंपिंग करने के निर्देश जारी करता है। पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करने की भी बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का कोई असर दिखाई नहीं देता। न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो अवैध डंपिंग पर तत्काल रोक लगाई जा सकती है, लेकिन निगरानी की कमी के कारण ट्रांसपोर्टरों के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन, पर्यावरण विभाग और खनिज विभाग से मांग की है कि सड़क किनारे और खुले स्थानों पर हो रही अवैध राखड़ डंपिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले ट्रांसपोर्टरों और संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है तथा क्षेत्र में जनआंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।
