
✍️ भागीरथी यादव
व्हीलचेयर पर रहकर भी जिन्होंने मरते दम तक लड़ी छत्तीसगढ़िया हक की लड़ाई
कोरबा/रायपुर, 29 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ की राजनीति के चाणक्य और प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जयंती पर आज पूरा प्रदेश भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। एक आईएएस अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री पद तक का उनका सफर न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि नवगठित छत्तीसगढ़ की दिशा तय करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही।
प्रथम मुख्यमंत्री की जयंती: याद किए गए छत्तीसगढ़िया अस्मिता के प्रखर स्वर
आईएएस की कुर्सी छोड़ राजनीति के शिखर तक पहुंचने वाले जोगी का योगदान आज भी अविस्मरणीय माना जाता है। उनके शब्द—
“मैं रहूँ या न रहूँ, छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियत हमेशा जीवित रहनी चाहिए”
आज भी प्रदेशवासियों के दिलों में गूंजते हैं।
बहुआयामी व्यक्तित्व: कलेक्टर से ‘जनता के मुख्यमंत्री’ तक
अजीत जोगी का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की मिसाल रहा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने आईपीएस और फिर आईएएस के रूप में प्रशासनिक सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य किया। इंदौर में लंबे समय तक कलेक्टर रहने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया।
राजनीति में प्रवेश के बाद उनकी वाक्पटुता और दूरदर्शिता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

नए छत्तीसगढ़ की नींव और ‘जोगी मॉडल’
1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया, तब उसकी बागडोर अजीत जोगी को सौंपी गई। एक नए राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों को उन्होंने अवसर में बदलते हुए प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया।
शिक्षा, अधोसंरचना और अंत्योदय के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने विकास की मजबूत नींव रखी, जिसे आज भी “जोगी मॉडल” के रूप में याद किया जाता है।
गरीबों और आदिवासियों की आवाज

उनकी राजनीति का केंद्र हमेशा समाज का वंचित वर्ग रहा। जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर उनकी गहरी समझ और स्पष्ट दृष्टिकोण ने उन्हें आदिवासी और ग्रामीण समाज के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाया।
संघर्षों से कभी नहीं हारी हिम्मत

जीवन के अंतिम वर्षों में शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अजीत जोगी ने सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ी। व्हीलचेयर पर रहकर भी उन्होंने प्रदेश की अस्मिता और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखा, जो उनकी अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार

छत्तीसगढ़ आज जिस विकास पथ पर अग्रसर है, उसमें जोगी के दूरदर्शी नेतृत्व का महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उस संकल्प को दोहराने का दिन है, जिसमें एक समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की परिकल्पना की गई थी।

“जोगी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति का वो अध्याय हैं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
बॉक्स: जोगी जी का जीवन एक नजर में जन्म: 29 अप्रैल 1946, गौरेला
शिक्षा: एमई (इंजीनियरिंग), स्वर्ण पदक विजेता
करियर: आईपीएस, फिर आईएएस (इंदौर के सबसे लंबे समय तक कलेक्टर)
राजनीति: राज्यसभा सदस्य, लोकसभा सदस्य, छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री
विशेष उपलब्धि: छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय अस्मिता को राष्ट्रीय पहचान दिलाई
यह समाचार जोगी के व्यक्तित्व, उनके योगदान और छत्तीसगढ़ के निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है—एक ऐसा नाम, जो प्रदेश की पहचान के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।

