
✍️ भागीरथी यादव
राज्य में गाइडलाइन दरों में सुधार को लेकर 20 नवंबर 2025 से मिले सुझावों और आपत्तियों पर विचार करते हुए केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक 7 दिसंबर को संपन्न हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर आयोजित इस बैठक में पंजीयन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए। सभी प्रावधान 8 दिसंबर से लागू हो चुके हैं।
इंक्रीमेंटल प्रणाली समाप्त, फिर लागू होगी स्लैब व्यवस्था
नगरीय क्षेत्रों में भूमि मूल्यांकन के लिए लागू इंक्रीमेंटल आधार पर गणना की व्यवस्था को अब समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर पूर्व की तरह स्लैब आधारित प्रणाली लागू रहेगी—
नगर निगम : 50 डिसमिल तक
नगर पालिका : 37.5 डिसमिल तक
नगर पंचायत : 25 डिसमिल तक
इस निर्णय से मूल्यांकन प्रक्रिया सरल होगी और नागरिकों को राहत मिलेगी।
फ्लैट/दुकान के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव
बहुमंजिला इमारतों में संपत्ति अंतरण के समय अब सुपर बिल्ट-अप नहीं, बल्कि बिल्ट-अप एरिया के आधार पर मूल्यांकन होगा।
साथ ही—
बेसमेंट और प्रथम तल पर 10% छूट
द्वितीय तल एवं ऊपर के तल पर 20% छूट लागू की गई है।
इससे वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा और मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट व दुकानें उपलब्ध होंगी।
मुख्य सड़क से दूर संपत्तियों के लिए 25% दर में कमी
कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में मुख्य मार्ग से 20 मीटर दूर स्थित संपत्तियों पर भूमि गाइडलाइन दर 25% कम होगी। दूरी का माप कॉम्प्लेक्स के मुख्य सड़क वाले निर्मित हिस्से से लिया जाएगा।
जिला मूल्यांकन समितियों को 31 दिसंबर तक भेजने होंगे संशोधित प्रस्ताव
नई दरों के संबंध में मिले ज्ञापनों और सुझावों की समीक्षा कर जिला समितियाँ 31 दिसंबर तक अपने प्रस्ताव भेजेंगी। इन्हीं के आधार पर आगे की गाइडलाइन संरचना तय की जाएगी।
ग्रामीण और नजूल भूमि के लिए बड़े सुधार
नजूल, आबादी और परिवर्तित भूमि पर अब हेक्टेयर दर
पहले वर्गमीटर दर लागू होती थी, जिससे जमीन का मूल्य बहुत बढ़ जाता था। अब कृषि भूमि की तरह हेक्टेयर दर लागू की गई है।
उदाहरण :
रायपुर वार्ड 28 — एक एकड़ भूमि का मूल्य पहले 78 करोड़ रु., अब केवल 2.4 करोड़ रु.
ग्रामीण क्षेत्रों में भी राहत
परिवर्तित भूमि पर सिंचित भूमि के 2.5 गुना मूल्य जोड़ने का प्रावधान समाप्त
दो फसली भूमि पर 25% अतिरिक्त दर खत्म
ट्यूबवेल, कुएं, वाणिज्यिक फसलें, वृक्षों का मूल्य अब भूमि मूल्य में शामिल नहीं होगा
कांकेर उदाहरण:
600 पेड़ों के 78 लाख रु. मूल्य को रजिस्ट्री से बाहर किया गया। खरीदार को 8.58 लाख रु. की प्रत्यक्ष राहत मिली और पेड़ कटाई रोकने में भी मदद मिली।
शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों को राहत 25–37.5 डिसमिल कृषि भूमि का मूल्यांकन अब हेक्टेयर दर पर होगा।
बरौदा (रायपुर) उदाहरण:
पुराने प्रावधान : 26.75 लाख रु.
नए प्रावधान : 6.30 लाख रु.
तालाब/मछली टैंक वाली भूमि पर 1.5 गुना दर, बाउंड्री वॉल व प्लिंथ लेवल की दर जोड़ने का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है।
निर्मित संपत्तियों की दरें 21 से घटकर मात्र 2
नगरीय निकायों में निर्मित संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए पहले 21 प्रकार की दरें लागू थीं। अब इन्हें घटाकर केवल दो
श्रेणियाँ रखी गई हैं, जिससे आम नागरिक के लिए मूल्यांकन बेहद सरल हो गया है।






