मरवाही की ओर से पहुंचे हाथी ने देर रात गांव में मचाया उत्पात, वन विभाग की तत्परता से टली बड़ी जनहानि, प्रभावित परिवारों को सहायता देने की तैयारी
सुशील जायसवाल
कटघोरा/पसान।
कटघोरा वन मंडल के वन परिक्षेत्र पसान अंतर्गत आने वाले तरई नार एवं पिपरहा गांव में बीती रात एक जंगली हाथी के अचानक पहुंच जाने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार हाथी मरवाही क्षेत्र की ओर से जंगल का रास्ता पार करते हुए गांव में घुस आया और कई घरों तथा मकानों को नुकसान पहुंचाया। हाथी के गांव में प्रवेश करते ही ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी ने गांव में जमकर उत्पात मचाया। कई कच्चे मकानों की दीवारें और छप्पर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक पक्के मकान की दीवार को भी हाथी ने जोरदार धक्का मारकर नुकसान पहुंचाया। घरों के आसपास रखे घरेलू सामान को भी क्षति पहुंची। घटना से प्रभावित परिवारों में भय का वातावरण बना हुआ है।
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग से टार्च,व सुरक्षित स्थान देने की ग्रामीणों ने मांग की!
ग्रामीणों ने बताया कि देर रात अचानक हाथी के चिंघाड़ने और मकानों को तोड़ने की आवाज सुनाई दी, जिससे पूरा गांव दहशत में आ गया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पूरी रात भय के साए में रहे। कई परिवारों ने रात खुले स्थानों अथवा अन्य सुरक्षित घरों में बिताई। लोगों का कहना है कि यदि विभाग शासन से मिलने वाले आवश्यक सामग्री टार्च एवं सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की जाय जिससे समय रहते अपने आप को बचाया जा सके, वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंचती तो बड़ी जनहानि भी हो सकती थी।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा हादसा
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। अधिकारियों और कर्मचारियों ने हाथी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखते हुए उसे आबादी क्षेत्र से बाहर जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया, जिसमें उन्हें सफलता मिली। वन विभाग की सक्रियता के कारण हाथी को समय रहते गांव से बाहर निकाल दिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
वन विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का प्रारंभिक आकलन शुरू कर दिया है। विभाग द्वारा बताया गया कि जिन परिवारों के मकानों को क्षति पहुंची है, उन्हें शासन के नियमानुसार मुआवजा एवं सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।
ग्रामीणों को दी गई सतर्क रहने की सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए रात के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें तथा जंगल की ओर जाने से बचें। किसी भी स्थान पर हाथी दिखाई देने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है। साथ ही ग्रामीणों से हाथियों को छेड़ने, उनके पास जाने अथवा पटाखे फोड़ने जैसी गतिविधियों से बचने का अनुरोध भी किया गया है।
लगातार बढ़ रही हाथियों की गतिविधियां
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से पसान क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ गई है। हाथियों के झुंड अक्सर जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंच रहे हैं, जिससे खेती-किसानी के साथ-साथ ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। किसान रातभर खेतों और घरों की रखवाली करने को मजबूर हैं। हाथियों के डर से बच्चे और महिलाएं भी भयभीत हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग द्वारा हाथियों को वापस जंगल की ओर खदेड़ा तो जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वे फिर आबादी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। ऐसे में केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
स्थायी समाधान की मांग
तरई नार और पिपरहा के ग्रामीणों ने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि हाथियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी योजना बनाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हाथियों के गांव में पहुंचने से लोगों की जान-माल का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसलिए हाथियों की नियमित निगरानी, त्वरित सूचना व्यवस्था, सुरक्षा दलों की तैनाती तथा आबादी क्षेत्र में उनके प्रवेश को रोकने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक कदम उठाए जाने चाहिए।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत प्रदान करेगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
