आईजी राम गोपाल गर्ग ने लागू की ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति”

✍️ भागीरथी यादव

 

 

उच्च स्तरीय पुलिस कार्यशाला में प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर जोर, गुंडा और निगरानी बदमाशों की सघन निगरानी के लिए नई SOP जारी, सभी एसपी को स्वयं मॉनिटरिंग के निर्देश।

 

बिलासपुर। बिलासपुर रेंज में अपराधों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में सोमवार को पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय स्थित मीटिंग हॉल से एक उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना प्रभारी सहित लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य “प्रिवेंटिव पुलिसिंग” को मजबूत करना और संपत्ति व शरीर संबंधी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सक्ती प्रफुल्ल ठाकुर ने गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की पहचान, निगरानी और वैधानिक कार्रवाई को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिस की प्राथमिकता केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकना होना चाहिए। इसके लिए “एक गुंडा-एक जवान” नीति लागू करते हुए प्रत्येक सक्रिय बदमाश की निगरानी की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी को सौंपी जाएगी।

बैठक में आदतन अपराधियों का वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकरण करने, उनके फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों और आपराधिक रिकॉर्ड को अपडेट रखने के निर्देश दिए गए। गंभीर अपराधियों के लिए गैंग हिस्ट्री शीट तैयार की जाएगी। वहीं बदमाशों की चेकिंग अनिश्चित समय पर करने, पुलिस टीमों के लिए विशेष सुरक्षा SOP अपनाने और डिजिटल व मैनुअल रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने पर भी जोर दिया गया।

आईजी ने निर्देश दिए कि जमानत पर छूटने के बाद दोबारा अपराध करने वाले आरोपियों के खिलाफ BNSS की धारा 480 के तहत तत्काल जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए। इसके अलावा धारा 110 BNSS, जिला बदर, बाउंड ओवर और PIT NDPS जैसे कठोर कानूनी प्रावधानों का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए। फरार अपराधियों की तलाश के लिए Natgrid, CDR और Cri-MAC जैसे आधुनिक तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

कार्यशाला में मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने पर भी विशेष जोर दिया गया। आईजी श्री गर्ग ने कहा कि विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों और नाबालिगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए तथा प्रत्येक कार्रवाई कानून और संविधान के दायरे में रहकर की जाए।

ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB) को अद्यतन रखने, कोटवारों और पुलिस मित्रों के साथ समन्वय बढ़ाने, मुसाफिर रजिस्टर एवं बीट प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही जो अपराधी लंबे समय से सामान्य जीवन जी रहे हैं और अपराध से दूर हैं, उन्हें निगरानी सूची से हटाने की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई, ताकि पुलिस का पूरा ध्यान सक्रिय अपराधियों पर केंद्रित रह सके।

बैठक के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों की नियमित मॉनिटरिंग करने और उनका अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “प्रिवेंटिव पुलिसिंग की सफलता पुलिस, कोटवारों, पुलिस मित्रों और आम जनता के बीच मजबूत संवाद पर निर्भर करती है। सामूहिक प्रयासों से ही बिलासपुर रेंज को अपराध मुक्त बनाया जा सकता है।”