पाँच माह से मानदेय नहीं मिलने से मितानिन प्रशिक्षिकाएँ परेशान

 

NHM की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, प्रशासन से की न्याय की गुहार

 

बिलासपुर।

शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिन प्रशिक्षिकाएँ (M.T.) और क्षेत्र समन्वयक (A.C.) पिछले पाँच महीनों से क्षतिपूर्ति (मानदेय/वेतन) न मिलने से आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रही हैं। इन कार्यकर्ताओं ने बताया कि अप्रैल से अगस्त 2025 तक का भुगतान लंबित है, जबकि वे लगातार सेवाएँ दे रही हैं।

 

दो बार आदेश, फिर भी भुगतान अटका

मितानिन प्रशिक्षिकाओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय ने दो बार भुगतान आदेश जारी किए, लेकिन फाइलें अटक जाने से राशि अब तक खातों में नहीं पहुँची। इससे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है।

 

आर्थिक संकट गहराया

मितानिन पूर्णिमा सोनी और विजेता साहू ने कहा कि –

“हमारी आय का यही एकमात्र साधन है। महीनों तक भुगतान न मिलने से बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च तक प्रभावित हो रहा है।”

कई प्रशिक्षिकाएँ आने-जाने का खर्च भी निकालने में असमर्थ हो रही हैं।

 

ज्ञापन सौंपा, आंदोलन की चेतावनी

सभी मितानिन प्रशिक्षिकाओं और क्षेत्र समन्वयकों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगी।

 

सेवाओं पर असर का खतरा

मितानिन प्रशिक्षिकाएँ गर्भवती महिलाओं, बच्चों और मरीजों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ पहुँचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर मानदेय नहीं मिला तो इसका सीधा असर आम नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।