✍️ भागीरथी यादव
बालोद। पीने के पानी की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। दल्लीराजहरा-महामाया मार्ग पर तीन दिनों से चक्काजाम और आमरण अनशन कर रहे ग्रामीणों को शनिवार सुबह पुलिस ने आंदोलन स्थल से हटा दिया। इसके बाद अपने माता-पिता को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाने और गांव में पानी की व्यवस्था कराने की मांग को लेकर 40 से अधिक बच्चे करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर थाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया, जिसके बाद बच्चे सड़क पर बैठकर अपनी मांग उठाने लगे।
जानकारी के अनुसार, आड़ेझर गांव के हजारों ग्रामीण बोइरडीही जलाशय से पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर गुरुवार से सड़क पर आंदोलन कर रहे थे। इनमें नौ ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठे थे। प्रशासन की ओर से तीन दिनों तक समझाइश देने का प्रयास किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर शनिवार सुबह पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हटा दिया।

कार्रवाई के दौरान 102 पुरुषों को दल्लीराजहरा के ओपन थिएटर और 30 से 40 महिलाओं को आईटीआई परिसर में पुलिस अभिरक्षा में रखा गया है। माता-पिता को पुलिस द्वारा ले जाए जाने के बाद बच्चे पैदल थाने पहुंचे। बच्चों की मांग है कि उनके माता-पिता को छोड़ा जाए और बोइरडीही जलाशय से उनके गांव को पीने का पानी दिया जाए।
आंदोलन से मालवाहक गाड़ियों का परिचालन भी प्रभावित
ग्रामीणों के चक्काजाम के कारण महामाया, दुलकी और कलवर माइंस से कच्चा लोहा लेकर आने-जाने वाले हजारों वाहनों का परिचालन प्रभावित हो रहा था। प्रशासनिक समझाइश विफल होने के बाद हुई पुलिस कार्रवाई से गांव में नाराजगी का माहौल है।
पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब बच्चों के सड़क पर उतरने तक पहुंच गया है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग का समाधान निकालना और स्थिति को सामान्य बनाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
