झाबू राखड़ डैम बना मौत का गड्ढा: हफ्ते में दूसरी बार टूटा बांध, JCB ऑपरेटर की मौत; शंकर इंजीनियरिंग पर गंभीर आरोप

✍️ भागीरथी यादव

 

 

 

150 मीटर नीचे गिरी मशीनें, बाइक दबे होने की आशंका; घटिया रेजिंग और कथित भ्रष्टाचार ने ली जान

कोरबा दर्री – झाबू क्षेत्र का राखड़ (फ्लाई ऐश) डैम एक बार फिर बड़े हादसे का कारण बना है। एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार डैम का हिस्सा टूट गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

ताजा घटना में डैम का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया, जिसके चलते वहां काम कर रही JCB और पोकलेन मशीन करीब 150 मीटर नीचे जा गिरी। इस भीषण हादसे में JCB ऑपरेटर मलबे में दब गया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

मृतक की पहचान  हुलेश्वर (उम्र 22 वर्ष), निवासी ग्राम सरगबुंदिया, जिला कोरबा के रूप में हुई है। इतनी कम उम्र में हुई इस मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे में कुछ बाइक भी दबे होने की आशंका है, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।

जनपद सदस्य प्रतिनिधि ने बताया

घटिया रेजिंग पर ठेकेदार कटघरे में

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर ठेकेदार ( शंकर इंजीनियरिंग ) को इस हादसे का जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि: • डैम की रेजिंग (ऊंचाई बढ़ाने का काम) पूर्व में शंकर इंजीनियरिंग द्वारा की गई थी

• यह काम पूरी तरह घटिया और नियमों के खिलाफ तरीके से किया गया

• निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी कर सिर्फ मुनाफा कमाने पर ध्यान दिया गया

लोगों का कहना है कि यही कमजोर और घटिया रेजिंग आज हादसे की सबसे बड़ी वजह बनी।

अधिकारी के साथ मिलीभगत के आरोप

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पूरा काम अधिकारियों और ठेकेदार शंकर इंजीनियरिंग की मिलीभगत से किया गया।

आरोप हैं कि: • राखड़ सप्लाई और निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार किया गया

• बिना सप्लाई के भी भुगतान किया गया

• विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया

17 करोड़ की पेनल्टी, वसूली की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में पहले भी करीब 17 करोड़ रुपये की पेनल्टी लग चुकी है। अब मांग उठ रही है कि: • यह राशि शंकर इंजीनियरिंग और संबंधित जिम्मेदार लोगों से वसूली जाए

• पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए

कृषि और पर्यावरण पर संकट

डैम टूटने से आसपास के क्षेत्रों में: • कृषि भूमि प्रभावित हुई है

• राखड़ और दूषित पानी फैलने से पर्यावरण को खतरा बढ़ गया है

स्थानीय लोगों ने पर्यावरण विभाग से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि फोन तक रिसीव नहीं किया गया। अब सवाल उठ रहा है:

➡️ क्या पर्यावरण विभाग कार्रवाई करेगा?

➡️ या फिर ऐसे हादसे यूं ही होते रहेंगे?

जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी पर सवाल

हादसे के बाद: • न तो ठेकेदार का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा

• न ही जिम्मेदार पक्ष की ओर से कोई जवाब सामने आया

इससे लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

जनता का आक्रोश और मांगें

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि: • शंकर इंजीनियरिंग पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो

• पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए

• 17 करोड़ की पेनल्टी की वसूली की जाए

झाबू राखड़ डैम का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लालच, लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का नतीजा बताया जा रहा है।

एक युवा मजदूर की जान जा चुकी है… और अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

अब सवाल यही है—क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या अगला हादसा होने का इंतजार किया जाएगा?