✍️ भागीरथी यादव
नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उच्च न्यायालय से एक बड़ा झटका लगा है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल द्वारा दायर उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने न्यायाधीश को मामले की सुनवाई से अलग (Recusal) होने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में न्यायाधीश पर पक्षपात के जो आरोप लगाए गए हैं, उनके पीछे कोई ठोस साक्ष्य (Evidence) मौजूद नहीं है। अदालत के अनुसार:
• याचिका केवल आशंकाओं और लांछनों (Aspersions) पर आधारित थी।
• कानूनी प्रक्रियाओं में इस तरह की मांग के लिए ठोस आधार होना अनिवार्य है, जो इस मामले में गायब दिखा।
• जज ने टिप्पणी की कि सुनवाई से हटने का अनुरोध तथ्यों के बजाय केवल व्यक्तिगत धारणाओं पर टिका था।
क्या होती है ‘Recusal’ याचिका?
जब किसी पक्ष को लगता है कि संबंधित न्यायाधीश का फैसला पक्षपाती हो सकता है या उनका मामले में कोई निजी हित है, तो वे न्यायाधीश से केस से हटने का अनुरोध करते हैं। इसे ‘रिक्युजल’ कहा जाता है।
इस मामले में, अदालत ने केजरीवाल की दलीलों को अपर्याप्त माना और स्पष्ट किया कि न्यायपालिका बिना किसी दबाव या निराधार आरोपों के अपना काम जारी रखेगी।
