कोरबा पावर के 1600 मेगावाट विस्तार पर सवालों की आंधी, पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में शिकायतें सही पाई गईं

✍️ भागीरथी यादव

 

 

पुनर्वास अधूरा, प्रदूषण नियंत्रण पर अस्पष्टता—INTUC ने विस्तार प्रस्ताव निरस्त करने की उठाई मांग

कोरबा, 29 अप्रैल 2026।

कोरबा जिले के पताड़ी स्थित कोरबा पावर लिमिटेड (पूर्व में लैंको अमरकंटक पावर प्रा. लि.) के प्रस्तावित Phase-III 1600 मेगावाट विस्तार परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी 95 पृष्ठीय रिपोर्ट में शिकायतों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया है, जिससे परियोजना की पारदर्शिता और अनुपालन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (INTUC) के जिला अध्यक्ष शशांक दुबे द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खामियों और उल्लंघनों को रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 तथा 2012-13 में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित विस्थापित परिवारों को अब तक रोजगार और पुनर्वास का लाभ नहीं मिल पाया है। इनमें लाल बहादुर सोनवानी, गुंजन सोनवानी सहित अन्य प्रभावित परिवार शामिल हैं।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित पुनर्वास और रोजगार संबंधी दायित्व पूरे नहीं होते, तब तक परियोजना के विस्तार को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि Draft EIA में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और मरकरी उत्सर्जन नियंत्रण की तकनीकों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इसके साथ ही अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता, जल उपयोग, राख प्रबंधन और सामाजिक प्रभावों को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।

प्रस्तावित विस्तार के बाद कोयले की खपत 15.04 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे वायु प्रदूषण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। हसदेव नदी से बड़े पैमाने पर जल दोहन को लेकर भी रिपोर्ट में पर्यावरणीय खतरे की चेतावनी दी गई है।

इसके अलावा Draft EIA में 33 प्रतिशत ग्रीनबेल्ट के मानक के अनुरूप कम क्षेत्र दर्शाने और जिला कलेक्टर, कोरबा के 11 नवंबर 2022 के आदेश के अनुपालन नहीं होने का मामला भी उजागर हुआ है।

INTUC जिला अध्यक्ष शशांक दुबे ने कहा कि यह रिपोर्ट स्थानीय जनता और विस्थापितों की चिंताओं को प्रमाणित करती है। उन्होंने मांग की है कि प्रस्तावित Phase-III विस्तार को तत्काल निरस्त किया जाए तथा जब तक पुनर्वास और रोजगार सुनिश्चित नहीं होते, किसी भी प्रकार की पर्यावरणीय स्वीकृति न दी जाए।

उन्होंने Draft EIA में तथ्यों को छिपाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच, कंपनी प्रबंधन पर वैधानिक कार्रवाई और हसदेव नदी सहित कोरबा क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने की भी मांग की है।

दुबे ने चेतावनी दी कि पहले से ही देश के सबसे प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल कोरबा में यदि बिना पूर्ण अनुपालन के इस तरह के विस्तार को मंजूरी दी जाती है, तो यह स्थानीय जनता के स्वास्थ्य, पर्यावरण और विस्थापित परिवारों के अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय होगा।