✍️ भागीरथी यादव
हल्का नंबर 10 के पटवारी विनोद अग्रवाल का VIDEO वायरल, सुशासन के दावों पर उठे सवाल
सुशील जायसवाल
कोरबा/पसान।
प्रदेश सरकार एक ओर गांव-गांव में “सुशासन तिहार” मनाकर पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा अनुभाग अंतर्गत तहसील पसान के हल्का नंबर 10 क्षेत्र से सामने आए कथित रिश्वतखोरी के वीडियो ने पूरे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में हल्का नंबर 10 के पटवारी विनोद अग्रवाल कथित रूप से ग्रामीणों से पैसे लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों और किसानों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि वन पट्टा ऑनलाइन कराने के नाम पर उनसे ₹5,000 तक की राशि ली जाती है, वहीं फौती नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए ₹10,000 तक की मांग की जाती रही है। सबसे चिंताजनक बात यह बताई जा रही है कि इस कथित वसूली का सबसे अधिक शिकार गरीब आदिवासी किसान हो रहे हैं, जिन्हें अपने ही वैध सरकारी काम करवाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से “पैसा दो तभी काम होगा” जैसी व्यवस्था चल रही है। आरोप है कि बिना रकम दिए राजस्व विभाग की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और किसानों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई ग्रामीणों ने दावा किया कि मजबूरी में उन्हें कर्ज लेकर पैसे देने पड़े, ताकि उनके जमीन से जुड़े जरूरी काम पूरे हो सकें।
वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। लोग इसे केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली से जोड़कर देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई होती तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि वायरल वीडियो की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब किसानों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब देखना होगा कि वायरल वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में सुशासन के दावों के बीच भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई हो पाती है या नहीं। फिलहाल पूरे इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
