क्या कोरबा किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? अवैध रेत उत्खनन और नो-एंट्री में मौत बनकर दौड़ते ट्रैक्टरों पर कब लगेगी लगाम?

✍️ भागीरथी यादव

 

 

कोरबा। जिले में अवैध रेत उत्खनन और नो-एंट्री के दौरान तेज रफ्तार से दौड़ते रेत लदे ट्रैक्टरों को लेकर आम नागरिकों में भय और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। सड़कों पर हर दिन बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और दोपहिया वाहन चालक अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करने को मजबूर हैं। लोगों का सवाल है—क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा?

रेत का अनियंत्रित दोहन केवल सरकारी राजस्व की हानि नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के प्राकृतिक अधिकारों पर भी प्रहार है। नदियों का सीना लगातार छलनी हो रहा है। कई स्थानों पर नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है, किनारों का कटाव बढ़ रहा है, भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है और जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में इसका खामियाजा पूरे जिले को भुगतना पड़ सकता है।

 

दूसरी ओर, नो-एंट्री के दौरान तेज रफ्तार से गुजरते रेत लदे ट्रैक्टर लोगों के मन में असुरक्षा का माहौल पैदा कर रहे हैं। शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर नियमों की अनदेखी करते हुए दौड़ते भारी वाहन किसी भी क्षण किसी परिवार की खुशियां छीन सकते हैं। सड़क पर निकलने वाला हर नागरिक यह सोचने को मजबूर है कि वह सुरक्षित घर लौट पाएगा या नहीं।

 

कलेक्टर महोदय से जनता की मार्मिक अपील

 

माननीय कलेक्टर महोदय,

 

कोरबा की जनता आपसे हाथ जोड़कर निवेदन करती है कि किसी मासूम बच्चे की जान जाने, किसी परिवार के उजड़ने या किसी बड़े हादसे का इंतजार न किया जाए। आपकी एक सख्त कार्रवाई हजारों लोगों की जान बचा सकती है। आपकी संवेदनशील पहल नदियों को बचा सकती है और कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत कर सकती है।

 

जनता चाहती है कि अवैध रेत उत्खनन और अवैध परिवहन के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के व्यापक अभियान चलाया जाए। जिन वाहनों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई हो। सभी रेत घाटों की नियमित जांच हो, रात के समय विशेष निगरानी रखी जाए और नो-एंट्री नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

 

यह किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि कोरबा की जनता की सुरक्षा, नदियों के संरक्षण और कानून के सम्मान की मांग है।

 

यदि आज निर्णायक कदम उठाए जाते हैं, तो कल अनेक परिवारों को दुर्घटना का दर्द नहीं सहना पड़ेगा और हमारी नदियां भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सकेंगी।

 

कोरबा की जनता की यही पुकार है—

“हादसे का इंतजार मत कीजिए, समय रहते कार्रवाई कीजिए।”