पोड़ी उपरोड़ा के सुदूर वनांचल में विकास के दावों की खुली पोल

वोबासिन से सिंदुरगढ़ तक सड़क नहीं, दलदल में तब्दील हुआ रास्ता, ग्रामीणों का जीवन संकट में

 

शुरुआती बारिश में ही संपर्क मार्ग हुआ बदहाल, एंबुलेंस व जरूरी सेवाओं का पहुंचना भी मुश्किल

 

सुशील जायसवाल

 

सिंदुरगढ़ (पोड़ी उपरोड़ा)।

कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में आज भी विकास की बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों के लिए सपना बनी हुई हैं। शासन द्वारा ग्रामीण विकास, सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। इसका ताजा उदाहरण ग्राम बासिन से ग्राम पंचायत सिंदुरगढ़ को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग है, जो शुरुआती बारिश में ही पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर इतना अधिक कीचड़ और पानी भर गया है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन तो दूर, साइकिल तक निकालना जोखिम भरा हो गया है। रास्ते के दोनों ओर गहरी खाई और एक ओर रेलवे लाइन निर्माण कार्य होने के कारण लोगों के लिए आवाजाही और भी खतरनाक हो गई है। ऐसे में ग्रामीणों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांव में किसी बुजुर्ग, गर्भवती महिला या किसी अन्य व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना लगभग असंभव है। बारिश के दिनों में मरीजों को चारपाई या अन्य साधनों से कई किलोमीटर तक ले जाने की मजबूरी बन जाती है। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सिंदुरगढ़ के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता के कारण वर्षों से इस सड़क की स्थिति नहीं सुधर सकी है। शुरुआती बारिश के बाद भी मार्ग पर न तो मुरुम डलवाकर अस्थायी मरम्मत कराई गई और न ही लोगों के आवागमन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप पूरा मार्ग कीचड़ और गड्ढों से भर गया है।

 

विडंबना यह भी है कि जिस क्षेत्र में एसईसीएल की सिंदुरगढ़ परियोजना के अंतर्गत भूमिगत कोयला खदानों का संचालन हो रहा है और जहां से प्रतिदिन शासन को राजस्व प्राप्त होता है, उसी क्षेत्र के ग्रामीण आज भी बुनियादी सड़क जैसी आवश्यक सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में उद्योगों और परियोजनाओं से विकास की उम्मीद थी, लेकिन आज भी गांव के लोगों को बदहाल रास्तों पर जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।

 

गांव के युवा समार सिंह उईके ने इस जर्जर सड़क और कीचड़ से भरे मार्ग का वीडियो बनाकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि सड़क पूरी तरह कीचड़ से लथपथ है और लोगों का पैदल चलना भी बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक सड़क की समस्या नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की उपेक्षा की कहानी है।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात को देखते हुए तत्काल मुरुम डालकर सड़क को चलने योग्य बनाया जाए तथा स्थायी समाधान के लिए पक्की सड़क का निर्माण शीघ्र कराया जाए। साथ ही क्षेत्र में स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ग्रामीण विकास और अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने की बात करता है, तब आखिर सिंदुरगढ़ जैसे सुदूर गांवों के लोग कब तक बदहाल सड़क और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का दंश झेलते रहेंगे। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या का शीघ्र संज्ञान लेकर राहत पहुंचाएंगे, ताकि बरसात के मौसम में उनका जीवन और अधिक संकटग्रस्त न हो।