कोरबा : दो सप्ताह से बिजली की आंख-मिचौली से मोरगा क्षेत्र बेहाल…

9 ग्राम पंचायतों में छाया अंधेरा, शुद्ध पेयजल के लिए ग्रामीण परेशान; बच्चों की पढ़ाई से लेकर मोबाइल चार्जिंग तक प्रभावित

अधूरे पड़े विद्युत सब स्टेशन के कारण बढ़ी समस्या, किराए के जनरेटर से समरसेबल चलाकर ग्रामीण कर रहे पानी की व्यवस्था

 

मोरगा।

जिले के सीमावर्ती एवं दूरस्थ वनांचल क्षेत्र मोरगा, में पिछले करीब दो सप्ताह से बिजली की अनियमित आपूर्ति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्षेत्र में बिजली की आंख-मिचौली लगातार जारी रहने के कारण जहां रात के समय गांवों में अंधेरा छाया रहता है, वहीं दिन में भी बिजली की कटौती से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि मोरगा क्षेत्र से जुड़े करीब 9 ग्राम पंचायतों में नियमित विद्युत आपूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली की समस्या का सबसे ज्यादा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ा है। बिजली नहीं रहने से पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। गांवों में लगे समरसेबल पंप और अन्य विद्युत आधारित जलस्रोत बंद रहने के कारण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई जगह ग्रामीणों को मजबूरी में किराए पर जनरेटर मंगवाकर समरसेबल चलाना पड़ रहा है, तब कहीं जाकर घरों तक पानी पहुंच पा रहा है। इससे ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

किराए के जनरेटर से पानी की व्यवस्था

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण सबसे बड़ी परेशानी पेयजल को लेकर सामने आ रही है। गर्मी और अन्य मौसमों में पानी की जरूरत वैसे ही अधिक रहती है, लेकिन बिजली के अभाव में गांवों की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। मजबूरी में ग्रामीण चंदा या आपसी सहयोग से जनरेटर किराए पर लेकर समरसेबल चलाते हैं और पानी की व्यवस्था करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ रहा है। यदि बिजली की नियमित आपूर्ति शुरू हो जाए तो उन्हें जनरेटर पर होने वाला खर्च भी नहीं करना पड़ेगा और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर

लगातार बिजली कटौती का सीधा असर गांव के स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। शाम होते ही बिजली गुल हो जाने से बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी होती है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण सभी परिवारों के पास पर्याप्त वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। परीक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के सामने भी समस्या खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में बच्चों की पढ़ाई मोबाइल, ऑनलाइन सामग्री और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी जुड़ी हुई है। लेकिन बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज करना तक मुश्किल हो गया है। कई बार ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज कराने के लिए दूसरे गांवों या बाजार क्षेत्र का सहारा लेना पड़ता है।

मोबाइल चार्ज करना भी हुआ दुश्वार

बिजली की लगातार आंख-मिचौली के कारण मोबाइल फोन चार्ज करना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में मोबाइल संचार पहले ही सीमित है और बिजली की समस्या के कारण मोबाइल बंद हो जाने पर लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मोबाइल ही संपर्क का प्रमुख माध्यम है, लेकिन बिजली नहीं रहने से मोबाइल चार्ज नहीं हो पाता।

रात में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा

मोरगा क्षेत्र वनांचल एवं सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहां ग्रामीणों को रात के समय जहरीले जीव-जंतुओं और अन्य वन्यजीवों का खतरा भी बना रहता है। बिजली गुल रहने के कारण गांवों में अंधेरा छा जाता है, जिससे ग्रामीणों में भय का वातावरण बना रहता है। रात में घर से बाहर निकलने, खेतों की ओर जाने अथवा जरूरी कार्य के लिए आवागमन करने में भी ग्रामीणों को खतरा महसूस होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे के कारण सांप, बिच्छू सहित अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के दिखाई नहीं देने का खतरा बना रहता है। वनांचल क्षेत्र में ऐसी स्थिति को देखते हुए नियमित बिजली आपूर्ति केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मामला है।

अधूरा पड़ा है सब स्टेशन का काम

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में विद्युत समस्या के स्थायी समाधान के लिए सब स्टेशन का निर्माण कार्य प्रस्तावित है, लेकिन इसका काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सब स्टेशन का कार्य जल्द पूरा कर इसे चालू कर दिया जाए तो मोरगा क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में काफी सुधार आ सकता है।

लंबे समय से बिजली की समस्या झेल रहे ग्रामीणों में अब विभागीय व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण छोटी-सी तकनीकी खराबी को दूर करने में भी समय लग जाता है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को घंटों अथवा कई-कई दिनों तक बिजली संकट के रूप में भुगतना पड़ता है।

9 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

बिजली संकट का प्रभाव अकेले मोरगा तक सीमित नहीं है। क्षेत्र से जुड़ी करीब 9 ग्राम पंचायतों में भी बिजली की अनियमितता का असर देखने को मिल रहा है। इन पंचायतों के ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक बिजली व्यवस्था प्रभावित रहने से घरेलू कामकाज, पेयजल, शिक्षा, कृषि कार्य और छोटे व्यवसाय सभी प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि क्षेत्र की बिजली व्यवस्था की तत्काल जांच कराई जाए और जहां तकनीकी खराबी है, उसे जल्द दूर किया जाए। साथ ही अधूरे पड़े विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर उसे चालू किया जाए, ताकि भविष्य में बार-बार बिजली संकट की स्थिति निर्मित न हो।

ग्रामीणों ने की शीघ्र बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग

मोरगा क्षेत्र के ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें लगातार परेशान होना पड़ रहा है। पेयजल जैसी आवश्यक जरूरत के लिए जनरेटर किराए पर लेना पड़ रहा है, वहीं बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मोरगा क्षेत्र में नियमित एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए तथा अधूरे विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर उसे चालू किया जाए। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विद्युत विभाग इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान करेगा, जिससे क्षेत्र की करीब 9 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीणों को राहत मिल सके।