फिंगरप्रिंट लिया गया, लेकिन राशन नहीं मिला; विक्रेता ने 90 हितग्राहियों के मामले में स्वीकार की अनियमितता, जांच तेज
सुशील जायसवाल
बंजारी -कोरबा।
कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजारी की शासकीय उचित मूल्य दुकान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़ा एक बड़ा राशन घोटाला सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे न केवल खाद्य विभाग बल्कि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में पता चला है कि ग्राम पंचायत बंजारी के 402 राशन कार्डधारी हितग्राही जून माह के राशन से पूरी तरह वंचित रहे, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में वितरण संबंधी गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार राशन दुकान के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया गया।
4 जुलाई की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
4 जुलाई 2026 को अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि जून माह का राशन किसी भी पात्र हितग्राही को नहीं मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि राशन वितरण की जानकारी लेने पर उन्हें लगातार टाल-मटोल किया जाता रहा और कई परिवारों को बिना राशन के ही पूरे माह गुजारना पड़ा।
जांच के दौरान जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तब कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं, जिसने पूरे मामले को एक बड़े घोटाले का रूप दे दिया।
फिंगरप्रिंट लिया, लेकिन नहीं दिया राशन
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि करीब 90 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) सत्यापन किया गया, लेकिन उन्हें राशन नहीं दिया गया।
जांच के दौरान स्वयं राशन विक्रेता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि फिंगरप्रिंट लेने के बावजूद संबंधित हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरित नहीं किया गया। इस स्वीकारोक्ति के बाद पूरे मामले में गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर हेराफेरी की आशंका और गहरा गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद भी हितग्राहियों को राशन नहीं मिला, तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितता और संभावित फर्जी वितरण का मामला हो सकता है।
100 क्विंटल चावल का नहीं मिल रहा हिसाब
जानकारी के अनुसार बंजारी राशन दुकान को प्रत्येक माह लगभग 125 क्विंटल चावल का आवंटन होता है। लेकिन जून माह के आवंटन की जांच में करीब 100 क्विंटल चावल का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पाया है।
इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न के गायब होने से बड़े पैमाने पर गबन की आशंका जताई जा रही है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जिले के हाल के वर्षों का सबसे बड़ा राशन घोटाला साबित हो सकता है।
गरीबों के अधिकारों पर सीधा प्रहार
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की महत्वाकांक्षी सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवन रेखा है। लेकिन इस प्रकार की अनियमितताओं ने गरीब परिवारों के अधिकारों का खुला उल्लंघन किया है।
राशन नहीं मिलने के कारण कई परिवारों को आर्थिक और खाद्य संकट का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उधार लेकर परिवार का पालन-पोषण किया, जबकि कुछ परिवारों को दूसरे गांवों से अनाज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्न मांगें की हैं—
जून माह का लंबित राशन तत्काल सभी पात्र हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जाए।
पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
पीडीएस व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
खाद्य विभाग की जांच जारी
खाद्य विभाग द्वारा पूरे मामले की जांच जारी है। प्रारंभिक तथ्यों और विक्रेता के बयान के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। जांच अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड, स्टॉक पंजी, बायोमेट्रिक डेटा और वितरण रजिस्टर का गहन परीक्षण किया जा रहा है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
जिले के सबसे बड़े राशन घोटालों में शामिल हो सकता है मामला
बंजारी पंचायत में सामने आया यह मामला न केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली की खामियों को उजागर करता है, बल्कि गरीबों के लिए भेजे जाने वाले सरकारी खाद्यान्न की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
करीब 100 क्विंटल चावल का हिसाब नहीं मिलना, 402 हितग्राहियों को राशन से वंचित रखना और फिंगरप्रिंट लेने के बावजूद राशन का वितरण नहीं होना, इस पूरे प्रकरण को जिले के सबसे बड़े राशन घोटालों में से एक बना सकता है।
अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन की कार्रवाई और जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और उन्हें उनका हक का राशन जल्द मिलेगा।
