प्रतिबंध के बावजूद हसदेव डुबान क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध मत्स्याखेट, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

सुशील जयसवाल

 

कोरबा/बांगो (पोड़ी उपरोड़ा)। मछलियों के प्रजनन काल में 16 जून से 15 अगस्त तक लागू मत्स्याखेट प्रतिबंध के बावजूद हसदेव डुबान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मछली पकड़ने का मामला सामने आया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मत्स्य सहकारी समितियों ने आरोप लगाया है कि बाहरी बिचौलिये और कारोबारी दिन-रात जलाशय में जाल डालकर मछलियों का शिकार कर रहे हैं, जबकि शासन द्वारा इस अवधि में मत्स्याखेट पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।

प्रदेश शासन हर वर्ष प्रजनन काल के दौरान मछलियों के संरक्षण और जलीय जैव विविधता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दो माह के लिए मत्स्याखेट पर रोक लगाता है। नियमों के अनुसार इस अवधि में नदी, बांध और जलाशयों में मछली पकड़ना कानूनन अपराध है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद बांगो स्थित हसदेव जलाशय में खुलेआम प्रतिबंध का उल्लंघन होने के आरोप लग रहे हैं।

निगरानी टीम होने के बावजूद नहीं थम रही गतिविधियां

शासन द्वारा बंद ऋतु के दौरान अवैध मत्स्याखेट रोकने के लिए विशेष जांच एवं निगरानी दल गठित किया गया है। अधिकारियों को नियमित गश्त, निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि निगरानी केवल कागजों तक सीमित है और मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध मत्स्याखेट लगातार जारी है।

बाहरी बिचौलियों पर गंभीर आरोप

जनपद सदस्य एवं सभापति भारत सिंह सिदार ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत सिमगा के पारसमाल, डांड और सरपता क्षेत्र में जिला सूरजपुर के बलदेव नगर से आए करीब आधा दर्जन बिचौलिये खुलेआम अवैध मत्स्याखेट कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन सक्रिय होता तो प्रतिबंध अवधि में इस तरह की गतिविधियां संभव नहीं होतीं।

22 मत्स्य सहकारी समितियों ने पहले ही सौंपा था ज्ञापन

विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति एवं हसदेव जलाशय क्षेत्र की 22 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के संयुक्त संगठन ने 9 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ, रायपुर के प्रबंध संचालक को ज्ञापन सौंपकर बंद ऋतु के दौरान सख्ती से प्रतिबंध लागू कराने और अवैध मत्स्याखेट करने वालों पर कार्रवाई की मांग की थी। बावजूद इसके क्षेत्र में अवैध गतिविधियां जारी रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

जैव विविधता और आजीविका पर संकट

विशेषज्ञों के अनुसार प्रजनन काल में मछलियों का शिकार होने से उनकी संख्या में गिरावट आती है, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन प्रभावित होता है। इसका सीधा असर हसदेव जलाशय क्षेत्र के उन हजारों परिवारों पर पड़ सकता है, जिनकी आजीविका मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर है।

कड़ी कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और मत्स्य सहकारी समितियों ने जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग से मांग की है कि हसदेव डुबान क्षेत्र में अवैध मत्स्याखेट पर तत्काल रोक लगाई जाए, बाहरी बिचौलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा गठित निगरानी दल को सक्रिय कर प्रतिबंध अवधि के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।