हर दिन करोड़ों की कमाई, फिर भी सड़कों की बदहाली बरकरार — लखनपुर मार्ग पर ग्रामीणों का चक्काजाम

कोरबा, 31 अक्टूबर 2025:

प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कोरबा एक बार फिर अपनी टूटी-फूटी सड़कों को लेकर सुर्खियों में है। जहां एक ओर यहां से रोज़ाना लाखों टन कोयले का उत्पादन होकर करोड़ों रुपये का राजस्व राज्य सरकार को मिलता है, वहीं दूसरी ओर इन इलाकों की सड़कें अपनी जर्जर हालत पर रो रही हैं।

 

इसी बदहाल स्थिति से परेशान होकर कटघोरा थाना क्षेत्र के लखनपुर मार्ग पर शुक्रवार को ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण — जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल थे — सड़क पर उतर आए और कोयला परिवहन पूरी तरह रोक दिया।

 

 

गड्ढों से भरी सड़कें, रोज़ हादसे

 

ग्रामीणों का कहना है कि रोज़ाना हजारों की संख्या में भारी ट्रक और ट्रेलर कोयला ढोते हुए इसी मार्ग से गुजरते हैं। इन वाहनों के दबाव से सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं।

जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं, जिससे दोपहिया और छोटे वाहन चालकों को हर रोज़ हादसे का जोखिम उठाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार दुर्घटनाएँ होने के बावजूद प्रशासन और कोल कंपनियां चुप्पी साधे हुए हैं।

 

 

वादाखिलाफी पर फूटा गुस्सा

 

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने इसी मुद्दे पर आंदोलन किया था। तब प्रशासनिक अधिकारियों ने सड़क मरम्मत का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बाद भी हालत जस की तस है।

ग्रामीणों ने कहा —

 

> “सरकार हर दिन कोयले से करोड़ों कमा रही है, लेकिन हमारे गांव तक आने वाली सड़कों की सुध लेने वाला कोई नहीं। जब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”

 

 

 

 

 

कोयला परिवहन ठप — प्रशासन मौके पर

 

चक्काजाम की जानकारी मिलते ही कटघोरा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की।

हालांकि ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।

इस दौरान कोयला परिवहन कई घंटों तक ठप रहा, जिससे ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं।

 

 

 

बड़ा सवाल — डीएमएफ का पैसा कहाँ जा रहा है?

 

कोरबा जिले से प्रतिदिन कोयला उत्पादन और परिवहन से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा डीएमएफ (जिला खनिज निधि) के तहत भी भारी भरकम राशि विकास कार्यों के लिए मिलती है।

इसके बावजूद उत्पादन क्षेत्र की सड़कों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब इन पैसों से प्रदेश के अन्य जिलों में सड़कें बन रही हैं, तो कोरबा के ग्रामीण क्षेत्रों को अब तक क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?