सुशील जयसवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वन विभाग में ठेका पद्धति लागू करने की मंशा और फ्रंट लाइन स्टाफ (वर्दीधारी बल) के लिए प्रस्तावित नई स्थानांतरण नीति का कड़ा विरोध किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दोनों फैसलों को ग्रामीणों, वनवासियों और वन कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में कार्य बहिष्कार कर आंदोलन किया जाएगा।
संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ वन प्रधान राज्य है और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आदिवासी परिवार अपनी आजीविका के लिए वन आधारित कार्यों पर निर्भर हैं। वृक्षारोपण, नर्सरी प्रबंधन, कूप कटाई, वन सुरक्षा और जल संरक्षण जैसे कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। संघ के मुताबिक ठेका पद्धति लागू होने पर बाहरी ठेकेदार मशीनों और बाहरी श्रमिकों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे स्थानीय वनवासियों के रोजगार पर संकट खड़ा होगा और पलायन बढ़ने की आशंका है।
वन सुरक्षा प्रभावित होने की जताई आशंका
वन कर्मचारी संघ ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा में स्थानीय वनवासियों और फ्रंट लाइन वन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संघ को आशंका है कि ठेका व्यवस्था के कारण स्थानीय भागीदारी कम होने से अवैध कटाई और वन्यजीवों से जुड़े अपराधों की रोकथाम प्रभावित हो सकती है। संघ ने वन संसाधनों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी बनाए रखने की मांग की है।
स्थानांतरण नीति को बताया विसंगतिपूर्ण
फ्रंट लाइन स्टाफ के लिए प्रस्तावित नई स्थानांतरण नीति को लेकर भी संघ ने नाराजगी जताई है। प्रदेश अध्यक्ष अजीत दुबे ने कहा कि वन विभाग के पत्र क्रमांक 3371/910/2019/10-1/1, दिनांक 18 अक्टूबर 2019 के माध्यम से पूर्व में भी ऐसी नीति को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। संघ का आरोप है कि पूर्व में स्थापित निर्देशों की अनदेखी कर नई नीति लागू करने की कोशिश से वर्दीधारी वन कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
तत्काल निर्णय नहीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन
संघ ने ठेका पद्धति वापस लेने, प्रस्तावित नई स्थानांतरण नीति पर रोक लगाने और वनवासियों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे छत्तीसगढ़ में वन विभाग के कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा।
संघ ने कहा है कि आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और वन विभाग के अधिकारियों की होगी। संघ ने सरकार से कर्मचारियों, वनवासियों और वन संरक्षण से जुड़े हितों को ध्यान में रखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
