ब्रेकिंग न्यूज : पसान रेंज के जंगली सूअर शिकार कांड पर फिर गरमाई सियासत, वायरल वीडियो से वन विभाग कटघरे में

 

डिप्टी रेंजर के कथित बयान ने बढ़ाए सवाल, वन रक्षक पर लेन-देन के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज

सुशील जायसवाल

कोरबा/पसान।

कटघोरा वनमंडल अंतर्गत पसान वन परिक्षेत्र में कुछ माह पूर्व सामने आए कथित जंगली सूअर शिकार मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने वन विभाग की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में पसान रेंज के लैंगा क्षेत्र की डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी द्वारा कथित रूप से यह स्वीकार किए जाने की चर्चा है कि शिकार प्रकरण में संबंधित वन रक्षक ने आरोपित शिकारियों से पैसे लिए थे।

वीडियो के वायरल होते ही पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

वन रक्षक पर कार्रवाई नहीं, उठ रहे कई सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस वन रक्षक का नाम कथित लेन-देन के मामले में सामने आ रहा है, वह आज भी उसी क्षेत्र में पदस्थ है। ऐसे में विभाग की निष्पक्षता और कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि विभाग के पास आरोपों को गलत साबित करने के पर्याप्त आधार हैं तो स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, और यदि आरोप सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई होना आवश्यक है।

क्या मिला विभागीय संरक्षण?

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि कहीं पूरे मामले में कुछ कर्मचारियों को विभागीय संरक्षण तो नहीं मिला। लोगों का मानना है कि यदि शिकारियों से कथित लेन-देन हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए। कार्रवाई के अभाव ने संदेह और गहरा कर दिया है।

सोशल मीडिया में छाया मामला

वायरल वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों ने वन विभाग से पूरे प्रकरण की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि ऐसे मामलों में ढिलाई वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को कमजोर कर सकती है।

वन विभाग की चुप्पी से बढ़ी उत्सुकता

गौरतलब है कि वायरल वीडियो और उसमें लगाए गए आरोपों को लेकर वन विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। विभाग की यह चुप्पी भी लोगों के बीच सवालों को जन्म दे रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस पूरे मामले को किस गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

क्षेत्रवासियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था में लोगों का विश्वास कायम रहे।

फिलहाल पसान रेंज का यह कथित शिकार कांड और वायरल वीडियो क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब सबकी नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।