लगातार बदलते प्राचार्यों से जूझ रहे कोरबी हाईस्कूल को मिला नया नेतृत्व, अभिभावकों में जगी नई उम्मीद

 

 

एक वर्ष में कई बार बदला प्रभार, अब एस.के. दिनकर के हाथों में विद्यालय की कमान

 

सुशील जायसवाल

कोरबा/कोरबी चोटिया। पोड़ीउपरोड़ा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरबी स्थित शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल पिछले एक वर्ष से लगातार प्रशासनिक अस्थिरता का सामना कर रहा था। बार-बार प्राचार्य बदलने की स्थिति के कारण विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। ऐसे माहौल में 16 जून 2026 से वरिष्ठ शिक्षक एस.के. दिनकर को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपे जाने के बाद अभिभावकों, विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों में विद्यालय के बेहतर संचालन की उम्मीद फिर से जाग उठी है।

 

विद्यालय लंबे समय से नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था। शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन, गुणवत्ता और समन्वय बनाए रखने के लिए स्थिर प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक मानी जाती है, लेकिन कोरबी हाईस्कूल में लगातार बदलते प्रभार के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होते रहे। यही कारण रहा कि विद्यालय अक्सर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।

जब विद्यालय ने देखा स्थिर नेतृत्व का दौर

 

स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व प्राचार्य पारले के कार्यकाल में विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर रही। विद्यालय का संचालन व्यवस्थित ढंग से हुआ और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों में भी सकारात्मक वातावरण देखने को मिला। किंतु उनके स्थानांतरण के बाद विद्यालय में नेतृत्व परिवर्तन का सिलसिला शुरू हो गया, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होने लगा।

 

गुलाबचंद गढ़वाल के निधन से पैदा हुई बड़ी चुनौती

 

प्राचार्य पारले के स्थानांतरण के बाद विद्यालय की जिम्मेदारी प्रभारी प्राचार्य गुलाबचंद गढ़वाल को सौंपी गई थी। दुर्भाग्यवश उनके आकस्मिक निधन ने विद्यालय प्रशासन को बड़ा झटका दिया। अचानक उत्पन्न हुई इस स्थिति ने शिक्षा विभाग के सामने नए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति की चुनौती खड़ी कर दी।

 

गढ़वाल के निधन के बाद कुछ समय के लिए रामआसरे सिंह तंवर को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया, लेकिन उनका कार्यकाल अधिक समय तक नहीं चल पाया। इसके बाद 30 अप्रैल 2026 से 6 जून 2026 तक मुरलीधर साहू को पदोन्नति अवधि के दौरान विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी दी गई।

 

स्वास्थ्य कारणों और सेवानिवृत्ति ने बढ़ाई परेशानी

 

सूत्रों के अनुसार मुरलीधर साहू स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण विद्यालय को अपेक्षित समय नहीं दे सके। इसी दौरान उनका सेवानिवृत्ति काल भी पूर्ण हो गया। परिणामस्वरूप विद्यालय को फिर नए प्रभारी की तलाश करनी पड़ी। लगातार बदलते नेतृत्व के कारण शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बना रहा।

 

वरिष्ठ शिक्षिका ने व्यक्तिगत कारणों से ठुकराया दायित्व

 

मुरलीधर साहू के सेवानिवृत्त होने के बाद वरिष्ठता के आधार पर विख्यात जायसवाल को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपने की तैयारी की गई थी। हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों तथा अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए यह जिम्मेदारी स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इससे विद्यालय में नेतृत्व का संकट और गहरा गया।

 

अंततः एस.के. दिनकर को मिली जिम्मेदारी

 

कई उतार-चढ़ाव और प्रशासनिक विचार-विमर्श के बाद वरिष्ठ शिक्षक एस.के. दिनकर को विद्यालय का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया। शिक्षा विभाग के इस निर्णय को विद्यालय में स्थायित्व लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

विद्यालय परिवार का मानना है कि एस.के. दिनकर लंबे समय से शैक्षणिक कार्यों से जुड़े रहे हैं और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के बीच उनकी सकारात्मक छवि है। ऐसे में उनके नेतृत्व में विद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

 

अभिभावकों और ग्रामीणों की अपेक्षाएं बढ़ीं

 

नए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति के बाद क्षेत्र के अभिभावकों और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि विद्यालय को स्थिर नेतृत्व मिलता है तो शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन, परीक्षा परिणाम और विद्यार्थियों की गतिविधियों में निश्चित रूप से सुधार होगा।

 

ग्रामीणों का मानना है कि पिछले एक वर्ष से चल रही प्रशासनिक अस्थिरता अब समाप्त होनी चाहिए और विद्यालय को विकास की नई राह पर आगे बढ़ना चाहिए। अभिभावकों ने भी उम्मीद जताई है कि नए प्रभारी प्राचार्य विद्यालय में नियमित मॉनिटरिंग, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देंगे।

 

अब सबकी नजर नए नेतृत्व पर

 

लगातार नेतृत्व परिवर्तन से चर्चा में रहे कोरबी हाईस्कूल के लिए एस.के. दिनकर की नियुक्ति एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व विद्यालय की चुनौतियों से किस तरह निपटता है और शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कितना सफल होता है। फिलहाल विद्यालय से जुड़े सभी पक्षों की निगाहें नए प्रभारी प्राचार्य के कार्यकाल पर टिकी हुई हैं और सभी बेहतर परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं।