आगामी खरीफ सीजन, मानसून और हाथियों के बढ़ते जमावड़े से किसान चिंतित

 

वन विभाग चला रहा जागरूकता अभियान, ग्रामीणों को दिए जा रहे सुरक्षा एवं बचाव के प्रशिक्षण

सुशील जायसवाल

कटघोरा/कोरबी चोटिया।

खरीफ सीजन की शुरुआत और मानसून की दस्तक के साथ ही हाथी प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। खेती-किसानी के कार्यों में जुटे ग्रामीणों को एक ओर जहां बेहतर वर्षा की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे जंगली हाथियों के जमावड़े ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। फसलों के नुकसान और जनहानि की आशंका को देखते हुए वन विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

कटघोरा वन मंडल के केंदई परिक्षेत्र अंतर्गत कोरबी चोटिया सर्किल के हाथी प्रभावित गांवों में वन विभाग की ओर से लगातार बैठकें एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार, उनके आवागमन की जानकारी तथा उनसे सुरक्षित रहने के उपायों से अवगत कराना है।

जानकारी के अनुसार पिछले लगभग आठ वर्षों से कटघोरा वन मंडल क्षेत्र में 50 से अधिक जंगली हाथियों का विचरण बना हुआ है। केंदई, पसान, एतमानगर, जटगा सहित आसपास के कई गांव हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। हर वर्ष खेती के मौसम में खेतों में किसानों की आवाजाही बढ़ने के साथ हाथियों का आवागमन भी बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन जाता है।

हाथियों के कारण फसल क्षति के साथ-साथ जनहानि की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। विभाग द्वारा हाथी मित्र दल का गठन कर सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है। हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा उनकी मौजूदगी की जानकारी तत्काल प्रभावित गांवों तक पहुंचाई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी, जनसंपर्क, बैठक एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। वन अमला लगातार गांवों का दौरा कर ग्रामीणों को हाथियों के नजदीक न जाने, उन्हें उकसाने का प्रयास न करने तथा समूह में सुरक्षित रहने की समझाइश दे रहा है।

पोड़ी खुर्द एवं बगबुड़ी में दिया गया विशेष प्रशिक्षण

वन विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के तहत हाथी व्यवहार विशेषज्ञ एवं ट्रेनर प्रभात दुबे ने पोड़ी खुर्द और बगबुड़ी गांव में ग्रामीणों को हाथियों से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, रात्रि के समय अकेले खेत या जंगल की ओर न जाने, हाथियों को देखने के लिए भीड़ एकत्रित न करने तथा किसी भी गतिविधि की तत्काल सूचना वन विभाग को देने की सलाह दी।

प्रभात दुबे ने बताया कि हाथी सामान्यतः शांत स्वभाव के होते हैं, लेकिन भय, तनाव या उकसावे की स्थिति में आक्रामक हो सकते हैं। इसलिए ग्रामीणों को संयम रखते हुए वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

किसानों ने जताई चिंता

बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को लंबे समय तक खेतों में रहना पड़ता है। ऐसे में हाथियों की मौजूदगी से हमेशा खतरा बना रहता है। किसानों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने तथा समय पर सूचना उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि जनहानि और फसल नुकसान जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित

आयोजित कार्यक्रम में पोड़ी खुर्द के सरपंच प्रतिनिधि गमलेश कुमार तंवर, उपसरपंच प्रीतम दास, परिक्षेत्र सहायक सुनील डिक्सेना, गंगाराम नेताम, सुरेश चंद्रा, शारदा शर्मा, प्रहलाद सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलते ही सतर्क रहें, अफवाहों पर विश्वास न करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन अमले को सूचना दें। विभाग का मानना है कि जनसहयोग और जागरूकता के माध्यम से ही मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।