‘मन की बात’ में गूंजा कोरबा का जल संरक्षण मॉडल, प्रधानमंत्री मोदी ने की ‘कैच द रेन’ अभियान की सराहना

✍️ भागीरथी यादव

 

कोरबा के रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज वेल मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान, कलेक्टर व निगमायुक्त ने नागरिकों से जल संरक्षण और वृक्षारोपण में भागीदारी की अपील

 

कोरबा, 26 जुलाई। जल संरक्षण के क्षेत्र में कोरबा जिले के नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कोरबा नगर पालिक निगम द्वारा ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत किए जा रहे वर्षा जल संरक्षण कार्यों का उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की। प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का जिक्र किए जाने से जिला प्रशासन, नगर निगम और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है।

 

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में शहर में वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन का रूप देने के लिए कई नवाचारी पहल की गई हैं। एसएएम-2.0 योजना के तहत शहर के 10 स्थानों पर नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) के तकनीकी परामर्श से इंजेक्ट वेल पद्धति पर आधारित रिचार्ज वेल बनाए गए हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश का पानी सीधे भूगर्भ में पहुंचाया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ भूजल स्तर में भी सुधार हो रहा है।

 

नगर निगम ने जनभागीदारी के माध्यम से 757 शासकीय और 971 निजी भवनों सहित कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित कराए हैं। इसके अलावा सभी नए भवन निर्माण की अनुमति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। सामुदायिक भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, मंगल भवनों और अन्य सार्वजनिक भवनों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। वर्तमान में 109 निर्माण कार्यों में यह व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

 

भूजल संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए नगर निगम ने शहर के 95 अनुपयोगी एवं क्षतिग्रस्त बोरवेलों को रिचार्ज संरचनाओं में बदलने की कार्ययोजना तैयार की है। इससे बेकार पड़े संसाधनों का उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जाएगा।

 

जल संरक्षण के साथ-साथ जिले में हरित आवरण बढ़ाने के लिए भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग द्वारा कोरबा और कटघोरा वनमंडल में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। इस वर्ष कोरबा वनमंडल में ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, कलेक्टर के निर्देश पर 15 सितंबर तक ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। नगर निगम ने 18 जुलाई को ‘रन फॉर ग्रीन कोरबा’ का आयोजन कर जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

 

प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख किए जाने को जिले की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर नवाचार, दूरदृष्टि और जनभागीदारी से किए गए प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर भी मिसाल बन सकते हैं। अब कोरबा का यह मॉडल देश के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहा है।

 

कलेक्टर कुणाल दुदावत और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं स्थापित कर वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन बनाएं तथा अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।