*पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र दो दिनों से* *अंधेरे में डूबा, आंधी-तूफान ने खोली* *बिजली विभाग की तैयारी और* *लापरवाही की पोल*

 

*गिरे पेड़, क्षतिग्रस्त हुए बिजली* *पोल और तार…* *दर्जनों गांवों में ठप पड़ी बिजली* *आपूर्ति, पेयजल* *संकट से ग्रामीण बेहाल*

*कोरबा / पोड़ी-उपरोड़ा*

शनिवार 30 मई की शाम आए तेज आंधी-तूफान का असर अब भी पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। तूफान गुजरने के दो दिन 24 घंटे के बाद भी कई गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं। जगह-जगह पेड़ गिरने से बिजली के तार टूट गए हैं, कई बिजली पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा अपनी जगह है, लेकिन इस घटना ने बिजली विभाग की तैयारियों, रखरखाव व्यवस्था और समय रहते किए जाने वाले कार्यों की पोल खोल दी है। समय पर लाइन किनारे पेड़ों की कटाई-छंटाई और आवश्यक मरम्मत की गई होती तो इतना बड़ा नुकसान शायद टल सकता था।

जानकारी के अनुसार पोड़ी-उपरोड़ा विद्युत उपकेंद्र अंतर्गत गुरसिया फीडर क्षेत्र के कई हिस्सों में पेड़ गिरने से 11 केवी और 33 केवी विद्युत लाइनें प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर तार टूटे पड़े हैं और बिजली खंभों को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते दर्जनों गांवों की बिजली आपूर्ति पिछले दो दिनों से पूरी तरह बंद है।

पेयजल संकट ने बढ़ाई परेशानी

बिजली गुल होने का सबसे बड़ा असर ग्रामीण इलाकों की पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। मोटर पंप बंद होने से लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। गांवों में हैंडपंप और सीमित जलस्रोतों पर भीड़ बढ़ गई है।

भीषण गर्मी नवतपा के बीच बिजली नहीं होने से पंखे, कूलर बंद पड़े हैं, वहीं पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। महिलाओं को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

*वनांचल क्षेत्र होने से रात का* *अंधेरा बना डर का कारण*

ग्रामीणों ने बताया कि पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र वनांचल और पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है। यहां हाथी, भालू, जहरीले सांप और बिच्छू जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी बनी रहती है। ऐसे में लगातार बिजली बंद रहने और रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाने से लोगों में भय का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे के कारण रात में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से डरे हुए हैं। कई गांवों में मोबाइल चार्जिंग तक की समस्या बनी हुई है, जिससे लोगों का संपर्क भी प्रभावित हो रहा है।

*बिजली विभाग की धीमी* *कार्यप्रणाली से नाराजगी*

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि तूफान के बाद बिजली सुधार कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। दो दिन बीत जाने के बाद भी कई गांवों में बिजली बहाल नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अमला क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत में तेजी नहीं दिखा पा रहा है। यदि मानसून और तूफान से पहले लाइन किनारे खड़े पेड़ों की नियमित छंटाई की जाती, जर्जर तारों और पोलों की समय रहते मरम्मत होती, तो नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता था।

*ग्रामीणों की मांग – जल्द बहाल* *हो बिजली, हो स्थायी* *समाधान*

क्षेत्र के ग्रामीणों ने बिजली विभाग और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

*ग्रामीणों ने मांग रखी है कि –*

बिजली लाइनों के आसपास खड़े खतरनाक पेड़ों की नियमित छंटाई कराई जाए

*जर्जर तार और पुराने बिजली* *पोल बदले जाएं*

*मानसून पूर्व विशेष रखरखाव* *अभियान चलाया* *जाए*

*ग्रामीण क्षेत्रों में आपात स्थिति* *के लिए त्वरित मरम्मत* *दल तैनात किया जाए*

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल आंधी-तूफान के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है। फिलहाल पूरे क्षेत्र के लोग बिजली बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।